अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फ़ोरम की 17वीं मंत्रिस्तरीय बैठक (IEF17) आज रियाद में शुरू हुई। इसका उद्घाटन सऊदी ऊर्जा मंत्री तथा उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री महामहिम प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ ने किया। बैठक की मेज़बानी सऊदी ऊर्जा मंत्रालय कर रहा है, जबकि इटली और नाइजीरिया सह-मेज़बान हैं। इसका विषय है- नए युग में ऊर्जा सुरक्षा और साझा लक्ष्य।
मंत्रिस्तरीय सत्र में अपने संबोधन में प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ ने कहा कि सऊदी अरब ने भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, निवेश जारी रखने और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि रियाद आज वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की राजधानी बन गया है। उन्होंने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का उदाहरण दिया, जो लाल सागर पर स्थित यनबू के रास्ते विश्व बाज़ारों तक आपूर्ति पहुँचाने का वैकल्पिक मार्ग देती है।
उन्होंने ज़ोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा एक साझा ज़िम्मेदारी है जिसे कोई देश अकेले नहीं निभा सकता, और यह अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता और विकास का आधार है। 2008 में ऊर्जा बाज़ारों के तीखे उतार-चढ़ाव को याद करते हुए उन्होंने संवाद, निवेश और तैयारी के महत्व पर बल दिया।
मंत्री ने कहा कि ऊर्जा ढाँचा बनाने में वर्षों लगते हैं और तैयारी न होने की क़ीमत विश्व अर्थव्यवस्था के लिए कहीं अधिक हो सकती है। सऊदी अरब तेल, गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और भूतापीय ऊर्जा को शामिल करने वाला समग्र दृष्टिकोण अपना रहा है।
बैठक में इटली के पर्यावरण एवं ऊर्जा सुरक्षा मंत्री, नाइजीरिया के पेट्रोलियम संसाधन राज्य मंत्री और फ़ोरम के महासचिव शामिल हुए। मंत्रियों और ऊर्जा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हुए हमलों के बाद सऊदी अरब और उसकी जनता के साथ पूरी एकजुटता जताई और फ़ोरम में अमेरिका की वापसी की घोषणा का स्वागत किया।
रियाद ऊर्जा सप्ताह के दौरान संयुक्त संगठन डेटा पहल (JODI) के साझेदार संगठनों के प्रमुखों की सातवीं बैठक भी हुई, जिसमें 2026 से 2030 तक के रोडमैप पर चर्चा हुई। मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फ़ोरम और ओपेक के बीच त्रिपक्षीय सहयोग जारी रहने का स्वागत किया।


