क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री महामहिम मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद ने आज रियाद में मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक की शुरुआत में देश की रक्षा, उसकी उपलब्धियों की हिफ़ाज़त और नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों की दृढ़ भूमिका की सराहना की गई।

परिषद ने कहा कि “आतंकवादी हूती मिलिशिया” को सऊदी हवाई अड्डों, मक्का, मदीना, दोनों पवित्र मस्जिदों के ज़ायरीन और नागरिक व आर्थिक प्रतिष्ठानों पर बार-बार किए गए हमलों और अपराधों का नतीजा भुगतना होगा। परिषद ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई, घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की और यमन में वैधता बहाली गठबंधन के सैन्य अभियानों की सराहना की। परिषद ने ज़ोर दिया कि सऊदी अरब अपनी सुरक्षा या लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की आज़ादी को ख़तरे में नहीं पड़ने देगा, और इन अपराधों की निंदा करने वाले देशों व संगठनों का आभार जताया।

परिषद ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन में तेल प्रवाह की बहाली की भी सराहना की और इसे सऊदी ऊर्जा व्यवस्था के लचीलेपन और वैश्विक बाज़ारों को भरोसेमंद आपूर्ति का प्रमाण बताया।

मीडिया मंत्री ने बताया कि परिषद ने मित्र देशों के साथ हाल की बातचीत की समीक्षा की, सऊदी-बहरीन समन्वय परिषद की सुरक्षा समन्वय समिति की पाँचवीं बैठक के नतीजों की सराहना की, इस सप्ताह रियाद में हो रहे 25वें विश्व पेट्रोलियम सम्मेलन और मंत्रिस्तरीय बैठकों के प्रतिभागियों का स्वागत किया और 2026 के राष्ट्रीय रक्तदान अभियान में लोगों की भागीदारी की प्रशंसा की।

प्रमुख फ़ैसलों में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के मानवीय कोषों में सऊदी अरब के शामिल होने की मंज़ूरी, खाड़ी सहयोग परिषद की खाद्य सुरक्षा रणनीति को तीन साल के लिए मार्गदर्शक के रूप में अपनाना, और विदेश व्यापार प्राधिकरण तथा सऊदी निर्यात विकास प्राधिकरण का विलय कर एक संस्था बनाना शामिल है, जिसके लिए ज़रूरी क़ानूनी प्रस्ताव 180 दिनों में पेश किए जाएँगे।

परिषद ने सीरिया के साथ सांस्कृतिक सहयोग, तुर्किये की वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद के साथ शोध सहयोग और सऊदी व मिस्र के केंद्रीय बैंकों के बीच समझौता ज्ञापनों को भी अधिकृत किया तथा राजदूत और मंत्री-पूर्णाधिकारी पदों सहित कई पदोन्नतियों को मंज़ूरी दी।