मस्जिद-ए-हराम और मस्जिद-ए-नबवी की धार्मिक मामलों की प्रेसीडेंसी द्वारा जेद्दा विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित ‘हिदायाथॉन’ के सत्रों में इस बात पर चर्चा हुई कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) से धार्मिक जागरूकता और दो पवित्र मस्जिदों में आने वालों को दी जाने वाली सेवाएँ कैसे बेहतर की जा सकती हैं।

‘दो पवित्र मस्जिदों में धार्मिक जागरूकता में आधुनिक तकनीकें’ विषय पर संवाद सत्र में अधिक प्रभावी और टिकाऊ तकनीकी अनुभव तैयार करने तथा इंटरैक्टिव ऐप्स और प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये आगंतुकों का अनुभव आसान बनाने और ज्ञान पहुँचाने के तरीकों पर बात हुई। प्रतिभागियों ने अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों तक ज्ञान को सरल रूप में पहुँचाने में तकनीक की भूमिका रेखांकित की, और प्रेसीडेंसी के इंटरैक्टिव ऐप्स के अनुभव की जानकारी भी दी गई।

‘धार्मिक अनुवाद और दो पवित्र मस्जिदों का वैश्विक संदेश’ विषय पर सत्र में अरबी भाषा की पहचान और उसकी शिक्षा के महत्व, इसे समर्थन देने में निजी, वक़्फ़ और परोपकारी क्षेत्रों की भूमिका तथा संदेश को दुनिया तक पहुँचाने के लिए अनुवाद में तकनीक के उपयोग पर ज़ोर दिया गया।

सत्र में पवित्र क़ुरआन के अर्थों और हदीस-ए-नबवी के अनुवाद में एआई की मदद लेने पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि एआई को प्रमाणित अनुवादों से ही प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वह सामग्री की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने वाला सहायक साधन बना रहे।

ये सत्र नवाचार को प्रोत्साहन देने और धार्मिक जागरूकता के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेसीडेंसी और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग का हिस्सा हैं। भारत से आने वाले हज और उमरा यात्रियों के लिए उनकी भाषाओं में भरोसेमंद धार्मिक जानकारी का महत्व इससे जुड़ा है।