70 से अधिक देशों के 176 मंत्रियों, विद्वानों, मुफ़्तियों और इस्लामी संगठनों, विश्वविद्यालयों व संस्थानों के प्रमुखों ने सऊदी अरब पर आतंकवादी हूती समूह के हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने हूतियों को ईरान-समर्थित मिलिशिया बताया और कहा कि ये हमले दो पवित्र मस्जिदों और वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं तथा हवाई अड्डों और अहम नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हैं।
सऊदी इस्लामी मामलों, दावा और मार्गदर्शन मंत्री शेख़ डॉ. अब्दुल लतीफ़ बिन अब्दुलअज़ीज़ आल अल-शेख़ को भेजे गए बयानों और संदेशों में उन्होंने इन हमलों को पवित्र स्थलों की मर्यादा और मानवीय व नैतिक मूल्यों का खुला उल्लंघन बताया और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ज़िम्मेदारों को जवाबदेह ठहराने के लिए दृढ़ अंतरराष्ट्रीय रुख़ की माँग की।
उन्होंने सऊदी हवाई अड्डों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की विशेष रूप से निंदा की, क्योंकि इससे नागरिकों और यात्रियों की जान ख़तरे में पड़ती है, उड़ानें बाधित होती हैं और दुनिया भर से आने वाले उमरा यात्रियों व ज़ायरीन को कठिनाई होती है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि सऊदी अरब के साथ खड़ा होना धार्मिक, नैतिक और मानवीय दायित्व है और दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा केवल सऊदी अरब का नहीं, बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों का विषय है। उन्होंने अपनी संप्रभुता और नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के लिए हर ज़रूरी कदम उठाने के सऊदी अरब के वैध अधिकार का समर्थन किया।
उन्होंने दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद और युवराज एवं प्रधानमंत्री महामहिम शहज़ादा मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के नेतृत्व में इस्लाम, मुसलमानों और श्रद्धालुओं की सेवा में सऊदी अरब की भूमिका की सराहना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निवारक कदम उठाने का आह्वान किया।
