मदीना में उमरा करने आई 52 वर्षीय एक भारतीय महिला की जान सऊदी रेड क्रिसेंट प्राधिकरण के पैरामेडिक्स ने बचा ली। अल-बक़ी क़ब्रिस्तान के पास उनकी हृदय गति और सांस अचानक रुक गई थी। टीम 50 सेकंड के भीतर उन तक पहुंची और उनकी धड़कन वापस लौटाई।
मौके पर पहुंचते ही टीम ने हृदय गति रुकने की पुष्टि की और तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) सहित आपातकालीन उपचार शुरू किया। धड़कन लौटने और हालत स्थिर होने के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए बाब जिब्रील स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
सऊदी रेड क्रिसेंट की मदीना शाखा के कार्यवाहक महानिदेशक डॉ. उमर अल-अत्तास ने कहा कि त्वरित प्रतिक्रिया और समय पर हस्तक्षेप ने ही उनकी जान बचाई। उन्होंने बताया कि मस्जिद-ए-नबवी के आसपास के केंद्रीय क्षेत्र में तैनात मेडिकल टीमें चौबीसों घंटे काम करती हैं और आगंतुकों को तेज़ आपात सेवा देने के लिए बनी परिचालन योजनाओं के तहत तैनात रहती हैं।
डॉ. अल-अत्तास ने कहा कि ऐसे मामले दिखाते हैं कि चिकित्सा आपातकाल की तुरंत सूचना देना क्यों ज़रूरी है और समय पर हस्तक्षेप से जीवित बचने की संभावना कितनी बढ़ जाती है। उन्होंने भीड़ के चरम समय में आपातकालीन कर्मियों की तैयारी और पेशेवर दक्षता की भी सराहना की।
