मक्का क्षेत्र के अल-लैथ प्रांत में स्थित वादी हलिया, जिसे वादी अल-शक़्क़ा अल-शामिया या "उत्तरी शक़्क़ा" के नाम से भी जाना जाता है, खेतों, कच्चे रास्तों और सिंचाई नालियों से बना एक ग्रामीण दृश्य प्रस्तुत करती है। यह तिहामा मैदान में किसानों और उनकी ज़मीन के गहरे रिश्ते को दर्शाता है।
इस घाटी की हरियाली के साथ इतिहास भी जुड़ा है। जहाँ यह वादी लाल सागर में मिलती है, वहाँ उसके बाढ़ मैदान में प्राचीन शहर अल-सिर्रैन स्थित है, और उसके दक्षिण में वादी अलीब का मुहाना है, जिसे "दक्षिणी शक़्क़ा" कहा जाता है।
खेतों की तस्वीरों में हरी क्यारियाँ दिखती हैं जिन्हें मिट्टी के रास्ते अलग करते हैं, और किनारों पर लगे पेड़ नालियों पर छाया डालते हैं। एक खेत में पाइप से पानी मिट्टी की नाली में गिरता है और फिर क्यारियों में फैल जाता है, जो फ़सल के लिए पानी की अहमियत और किसानों की मेहनत को दिखाता है।
रिपोर्ट के अनुसार इन तरीकों का दस्तावेज़ीकरण स्थानीय ग्रामीण ज्ञान को बचाने में मदद करता है। खेती और अल-सिर्रैन की विरासत का यह मेल ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं के अध्ययन का आधार बन सकता है, बशर्ते वह खेतों की निजता और फ़सलों का ध्यान रखे और स्थानीय लोगों को उसके लाभ में भागीदार बनाए।
रिपोर्ट खेती की ज़मीन बचाने, पानी के बेहतर उपयोग और नालियों की सफ़ाई पर भी ज़ोर देती है।


