दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक (ख़ादिम-ए-हरमैन शरीफ़ैन) के उमरा और ज़ियारत कार्यक्रम 1448 हिजरी के मेहमानों का आगमन बुधवार को पूरा हो जाएगा, जब चौथा और अंतिम जत्था मदीना पहुंचेगा। इसके साथ इस साल कुल मेहमानों की संख्या 65 देशों के 1000 उमरा यात्री हो जाएगी। सऊदी अरब के इस्लामी मामलों, दावा और मार्गदर्शन मंत्रालय ने बताया कि उनके स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

अंतिम जत्थे में 21 देशों के 250 पुरुष और महिला उमरा यात्री हैं। ये देश हैं: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव, कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अज़रबैजान, तुर्किये, जॉर्जिया, रूस, भूटान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, वानुअतु, सोलोमन द्वीप और फ़िजी।

मदीना में मेहमान मस्जिद-ए-नबवी में नमाज़ अदा करेंगे, रौज़ा शरीफ़ की ज़ियारत करेंगे और मस्जिद-ए-क़ुबा में नमाज़ पढ़ेंगे। वे उहुद पहाड़, उहुद के शहीदों के क़ब्रिस्तान, किंग फ़हद क़ुरआन मुद्रण परिसर और पैगंबर की सीरत व इस्लामी सभ्यता की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं संग्रहालय भी देखेंगे।

इसके बाद वे उमरा अदा करने मक्का जाएंगे, जहां वे किंग अब्दुलअज़ीज़ काबा किस्वा परिसर, वह्य (वही) प्रदर्शनी और कई इस्लामी व ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे।

मेहमानों की मेज़बानी दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के निजी ख़र्च पर उनकी मंज़ूरी से हो रही है। मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम इस्लाम और दुनिया भर के मुसलमानों के प्रति सऊदी नेतृत्व की देखभाल का हिस्सा है और मेहमानों को हज-उमरा यात्रियों की सेवा, दोनों पवित्र मस्जिदों व पवित्र स्थलों की देखरेख, क़ुरआन की सेवा तथा संयम और संतुलन के मूल्यों के प्रसार में सऊदी अरब की भूमिका को क़रीब से देखने का अवसर देता है।