सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ की ओर से सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान बिन अब्दुल्लाह ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन की बैठक में हिस्सा लिया। सऊदी अरब इस सम्मेलन में आमंत्रित देश के रूप में शामिल हुआ है।

“लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य की रूपरेखा” शीर्षक वाली इस बैठक में अपने संबोधन की शुरुआत में विदेश मंत्री ने दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ और क्राउन प्रिंस की शुभकामनाएँ पहुँचाईं। उन्होंने 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत के प्रयासों के लिए सऊदी अरब का आभार जताया और इस वर्ष के सम्मेलन के निमंत्रण की सराहना की।

प्रिंस फ़ैसल ने कहा कि क्षेत्र के मौजूदा हालात में प्राथमिकता तनाव कम करने और राजनीतिक व कूटनीतिक प्रयासों के लिए रास्ता खोलने की होनी चाहिए। उनके अनुसार अरब खाड़ी की सुरक्षा तब तक स्थिर नहीं हो सकती जब तक वहाँ के देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान न हो, उनके मामलों में हस्तक्षेप न किया जाए, अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों का पालन हो और विवाद शांतिपूर्ण तरीक़ों से सुलझाए जाएँ।

विदेश मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा, उसकी भूमि की अखंडता और उसके संसाधनों पर कोई आँच स्वीकार्य नहीं है, और खाड़ी सहयोग परिषद के देश किसी भी बहाने या नाम से अपनी भूमि, प्रतिष्ठानों या अहम हितों को निशाना बनाए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री मार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षा के महत्व पर बल दिया और चेताया कि किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक बाज़ारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक विकास तक पहुँचेगा।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमता मज़बूत करने की तत्काल ज़रूरत की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता इस बात से जुड़ी है कि उसके नियम और क़ानून कितनी एकरूपता से लागू होते हैं। उन्होंने ब्रिक्स और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अन्य साझेदारों के साथ संवाद जारी रखने की सऊदी अरब की इच्छा भी जताई। बैठक में भारत में सऊदी राजदूत हैथम बिन हसन अल-मालिकी भी मौजूद थे।