कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल उत्पादकता बढ़ाने का साधन नहीं रही, बल्कि सामाजिक ढाँचों को नया रूप दे रही है। सऊदी अरब में इसका असर महिलाओं की यात्रा में साफ़ दिखता है, जो पारंपरिक सशक्तिकरण से आगे बढ़कर भागीदारी और निर्णय-निर्माण की ओर जा रही हैं। नई तकनीकों ने फ़्रीलांसिंग, ऑनलाइन छोटे व्यवसाय, साइबर सुरक्षा, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्र खोले हैं, जबकि लचीले और दूरस्थ काम ने करियर और परिवार में संतुलन आसान बनाया है।

राष्ट्रीय महिला वेधशाला की निदेशक डॉ. सना मोहसिन अल-ओतैबी ने सऊदी प्रेस एजेंसी से कहा कि ये बदलाव उस लंबी यात्रा का विस्तार हैं, जिसमें सऊदी महिलाएँ परिवार, काम और उत्पादन में सक्रिय भागीदार रही हैं। उनके अनुसार सऊदी विज़न 2030 और नेतृत्व के समर्थन ने ध्यान अवसर उपलब्ध कराने से हटाकर भागीदारी की गुणवत्ता और प्रभाव पर केंद्रित किया है। उन्होंने सांख्यिकी महाप्राधिकरण के साथ पाँच आयामों पर विकसित 'विकास में महिलाओं की भागीदारी' सूचकांक (WPD) और रियाद क्षेत्र में महिलाओं की सामुदायिक भागीदारी के देश के पहले सूचकांक का उल्लेख किया।

लर्निंग डिसएबिलिटीज़ एसोसिएशन की सीईओ डॉ. फ़िरदौस जिब्रील फ़ल्लाता ने कहा कि महिलाएँ पारंपरिक सामुदायिक भूमिका से आगे बढ़कर निर्णय-निर्माण और सतत विकास में संस्थागत योगदान दे रही हैं।

1962 में स्थापित अल-नहदा महिला संस्था की सीईओ डॉ. मुज़ना अल-उमैर के अनुसार एआई रोज़मर्रा के कामों का बोझ घटाकर महिलाओं को नेतृत्व और रचनात्मक भूमिकाओं के लिए समय देता है। संस्था ने डेटा विश्लेषण और महिला नेतृत्व के निर्णयों में सहायता के लिए एआई आधारित प्रणाली विकसित की है, और 2020 में W20 समूह की अध्यक्षता के दौरान डिजिटल समावेशन उसके प्रमुख विषयों में था।

उन्होंने निजता उल्लंघन, पहचान की चोरी, डीपफ़ेक और ब्लैकमेल के ख़तरों से आगाह करते हुए डिजिटल जागरूकता बढ़ाने और संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने की अपील की। उनके मुताबिक़ एआई के क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय व्यवस्था बनाना अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है।