अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर अब्दुर्रहमान अल-सुदैरी सांस्कृतिक केंद्र – दार अल-उलूम ने बच्चों के लिए “बचपन की रोशनी” कार्यक्रम आयोजित किया। इस संवादात्मक अनुभव का उद्देश्य बच्चों को ऐसा सुरक्षित और प्रेरक माहौल देना था, जहां वे खुद को व्यक्त कर सकें, अपनी क्षमताएं पहचान सकें और रचनात्मक तरीकों से सकारात्मक भावनाओं और सामाजिक मूल्यों को मज़बूत कर सकें।
कार्यक्रम में कई संवादात्मक कोने और पड़ाव शामिल थे। “मेरी रोशनी का आईना” कोने में बच्चों ने काग़ज़ के आईने सजाए और चित्र व लेखन के ज़रिए अपनी पसंदीदा ख़ूबियों को व्यक्त किया, जबकि “मेरी हंसी” कोने में कला और अभिव्यक्ति से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से उन पलों और भावनाओं पर बात हुई जो उन्हें ख़ुशी देते हैं।
गतिविधियों में “बचपन का बग़ीचा” भी था, जहां बच्चों ने काग़ज़ के गुलाब बनाए, और “रोशनी का पहिया”, जिसमें ख़ुशी, खोज, देने की भावना, साहस, कल्पना और रचनात्मकता से जुड़ी चुनौतियां और काम दिए गए।
